ये और बात है कि आंधी हमारे बस में नहीं ,
मगर चिराग जलाना तो इख्तियार में है ...!!!
"खुश्क मैदान में ये किश्तियाँ यूँ ही नहीं
यहाँ ज़रूर कोई सैलाब आया होगा ...!!!"
मुझको तो मालूम नहीं
तुमको खबर है क्या ?
लोग कहते हैं कि
नादान है वो......!!!
किसी ने क्या खूब कहा था.....
"घर से निकलो छाँव न छोडो,
मझधार में नाव न छोडो
हार-जीत एक अलग बात है
सो तुम अपना दांव न छोडो ..."
बेइंतेहा खामोश थी
उसकी हसरतें,
लोग फ़िर भी क्यूँ उन्हें
कुचलते चले गए...!! "तन्हा"